तेरे दर को छोड़ कर Tere Dar Ko Chhod Kar Lyrics

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सन्त की शरण में आने से प्रारब्ध भी बदल जाता है।
Tere Dar Ko Chhod Kar Lyrics in Hindi

Jaigurudev Bhajan | तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊँ मैं,
सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊँ मैं–२ ।।१।।

जब से याद भुलाई तेरी लाखों कष्ट उठाये हैं,
क्या जानू इस जीवन अन्दर कितने पाप कमाये हैं।
हूँ शर्मिंदा आपसे क्या बतलाऊँ मैं।।२।।

मेरे पाप कर्म ही तुझसे प्रीत न करने देते हैं,
कभी जो चाहूँ मिलूँ आपसे रोक मुझे ये लेते हैं।
कैसे स्वामी आपके दर्शन पाऊं मैं।।३।।

तुम हो नाथ ज्ञान के दाता तुम से ज्ञान सब पाते हैं,
ऋषि मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते हैं।
छींटा दे दो ज्ञान का होश में आऊँ मैं।।४।।

Jaigurudev Bhajan | Tere Dar Ko Chhod Kar Lyrics

Tere dar ko chhod kar kis dar jaoon main,
sunata meri kaun hai kise sunaoon main–2 ..1..

Jab se yaad bhulai teri laakhon kasht uthaaye hain,
kya jaanoo is jivan andar kitane paap kamaaye hain.
hoon sharminda aapase kya batalaoon main..2..

Mere paap karm hi tujhse prit na karne dete hain,
kabhi jo chaahoon miloon aapase rok mujhe ye lete hain.
kaise Swami aapake darshan paoon main..3..

Tum ho naath gyaan ke daata tum se gyaan sab paate hain,
rshi muni aur yogi saare tere hi gun gaate hain.
chhinta de do gyaan ka hosh mein aaoon main..4..

Read above: Tere Dar Ko Chhod Kar Lyrics in Hindi

बाबा जयगुरुदेव का संक्षिप्त परिचय | Baba Jaigurudev, Ujjain

Jaigurudev Bhajan

बाबा जयगुरुदेव के नाम से प्रसिद्ध संत स्वामी तुलसीदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ था। बाबा जयगुरुदेव सात साल की उम्र में सत्य की खोज में निकल पड़े। 

कई वर्षों तक मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा आदि में सच्चे गुरु, भगवांन की खोज करते हुए अलीगढ़ के चिरौली गांव (इगलास तहसील) पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात संत घूरेलाल जी शर्मा (दादा गुरु) से हुई और उन्होंने जीवन भर के लिए उन्हें अपना गुरु मान लिया।

सभी शाकाहारी जीवन अपनाएं यही बाबा जय गुरुदेव की अपील है। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, जीवों की हत्या बंद हो और लोग शाकाहारी बने, इन सब सन्देश को देश के कोने कोने तक पहुँचाया गया।

बाबा जय गुरुदेव का 116 वर्ष की उम्र में शुक्रवार, 18 मई 2012 की रात मथुरा में निधन हो गया। उनके जाने के बाद, बाबा उमाकांत जी महाराज आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बने और जयगुरुदेव मिशन को आगे ले जा रहे हैं।

बाबा उमाकांत जी महाराज (Umakant Ji Maharaj) उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गाँव के नशामुक्त, शाकाहारी परिवार में जन्म हुआ। बाल्यावस्था से ही आध्यात्मिक रुचि के कारण पढ़ाई पूर्ण होते ही सन् 1973 में खिंचकर बाबा जयगुरुदेव के पास पहुँचे। नामदान (दीक्षा) लिया और बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आदेशानुसार सेवा, भजन कार्य में लग गए। 
Read above: Tere Dar Ko Chhod Kar Lyrics in Hindi and English

* जयगुरुदेव *

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